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परिचय
 
सर्वोमुखी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में विश्वभर में विकलांगों के उत्थान पर बल दिया जा रहा है । अंतर्राष्ट्रीय विकास की इस दौड़ में भारतवर्ष भी ज्यादा पीछे नहीं है वरन् अपनी जन-कल्याणोमुखी राष्ट्र की छवि को बरकरार रखते हुए देश में विकलांगजनों के सशक्तिकरण हेतु कई पहल किया है ।
सत्तर के दसक में कल्याण मंत्रालय (वर्तमान सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ) भारत सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की विकलांगता (अस्थि,दृष्टिबाधितार्थ ,वाक् ,श्रवम एवं मानसिक विकलांगता ) हेतु राष्ट्रीय संस्थानों की स्तापना करना ऐसी ही एक पहल है ।
लोकोमोटर विकलांगता (अस्थि विकलांग) के क्षेत्र में इस शीर्ष संस्थान की स्थापना 1978 में हुई और वर्ष 1982 में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1960 के तहत सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया ।
 
संस्थान का मुख्य उद्देश्य -
  • अस्थि विकलांगजन सेवा हेतु मानव संसाधन जैसे भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी)व्यवसायिक चिकत्सा (ऑक्युपेशनल थेरेपी ) कृत्रिम अंग प्रत्यंग (प्रोस्थेटिस्ट तथा ऑर्थोटिस्ट) तकनीशियन ,नियोजन अधिकारी एवं परामर्शदाताओं को परामर्श देना ।
  • अस्थि विकलांगजन के पुनर्वास संबंधी क्षेत्र में अनुसंधान एवं प्रायोजन ।
  • विकलांगजन को पुनर्वास सेवा ,विकलांगता सुधारक शल्य चिकित्सा ,व्यावसायिक चिकित्सा प्रशिक्षण एवं उपकरण प्रदान करना ।
  • विकलांगजन के लिये सहायक उपकरण, यंत्र का निर्माण मानकीकरण एवं वितरण में वृद्धि करना ।
    * विकलांगजन के लिये कार्यरत राज्य सरकारों स्वैच्छिक संगठनों को परामर्श सेवाऐं प्रदान करना ।
    * विकलांगता एवं पुनर्वास के क्षेत्र में सर्वोच्च प्रलेखन और सूचना केन्द्र के रूप में कार्य करना ।
 
 

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